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सेक्टर-8 जैन अस्पताल में अग्निशमन प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन..

अग्निशमन के बारे में सभी को जानकारी होना अनिवार्य है। यह कहना है अग्निशमन विभाग के फायर ऑफिसर फूलन प्रसाद सिंह का। वे आज दल-बल के साथ सेक्टर-8 जैन अस्पताल में आयोजित अग्निशमन प्रशिक्षण कार्यशाला में पहुंचे थे। यहाँ उन्होंने अस्पताल कर्मियों को अग्निशमन के तरीकों के बारे में बताया साथ ही मशीनरी उपयोगों के बारे जानकारी दी और लोगों को जागरूक किया। 


इससे पूर्व फायर ऑफिसर द्वारा फायर फाइटर्स से पानी के द्वारा किस प्रकार आग को नियंत्रित किया जा सकता है उसके बारे में विस्तार पूर्वक बताया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग तरह के आग पर नियंत्रण पाने के लिए अलग-अलग तरह के तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने बताया कि फर्नीचर तथा कागज में आग लगने पर उसे फायर फाइटर्स ए के माध्यम से बुझाया जाता है और तैलीय पदार्थों में लगी आग को बुझाने के लिए अग्निशमन के बी विधि का इस्तेमाल किया जाता है। 


उन्होंने बताया कि अस्पतालों में आग लगने के बाद अगर सिर्फ धुआं आता है तो तुरंत खिड़की खोलनी चाहिए ताकि मरीजों का दम न घुटे और अगर आग की लपटें तेज हो तो दरवाजा खिड़की कतई नहीं खोलनी चाहिए क्योंकि कार्बन मोनोआक्साइड आक्सीजन के संपर्क में आने के बाद तेजी से जलने लगता है और आग की लपटें और भी तेज हो जाती हैं। अगर अस्पताल के ऊपर तल्ले में आग लगी हो तो तुरंत सीढ़ी से चढ़ कर पहले तो खिड़की को खोलना चाहिए, ताकि उसमें बंद मरीजों का दम न घुट सके। अगर गैस के कारण आग लगती है, तो सबसे पहले तो जितनी भी लाइट और जलने वाली चीजें हैं, उसे कतई न जलाएं। कार्यशाला में डॉ जयदेव शर्मा, मुकेश कुमार गुप्ता, श्रेयांश जैन के अलावा काफी संख्या में नर्स एवं अस्पताल के कर्मियों ने आग बुझाने की तकनीक की जानकारी प्राप्त की।



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