Citizen Report : नेता एंव पदाधिकारी नहीं उठा रहे कोई ठोस कदम..
बोकारो जिले से सटे 20 से भी ज्यादा गांवों में पिछले 5 दिनों से बिजली आपूर्ति बाधित है। जिसकी वजह से ग्रामीणों का हाल बेहाल है लेकिन प्रशासन आंखें मूंद कर बैठी है। भतुआ, चौफान, बैधमारा, वास्तेजी, गंझुडीह, कनफट्टा, धनघरी, बेलडीह, पंचौरा, महलीडीह, शिबूटांड़, बौधनाडीह, कनारी, मानगो, झिकलप्पा, कुंडौरी, महेशपुर, आगरडीह, पिपराटांड, चैताटांड, महुआर इत्यादि 20 से भी ज्यादा गांवों में बिजली ना के बराबर आती है। 24 घंटे में महज 6-7 घंटे के लिए बिजली आती है, उसमें भी लो वोलटेज की समस्या रहती है।
दरअसल इन गांवों में गणेशपुर स्थित कांड्रा फीडर से बिजली सप्लाई कि जाती है। लेकिन इस रूट में लगे तार, इंसुलेटर एवं पोल कि हालत काफी बुरी हो चुकी है। इतना ही नहीं, इस रूट में कई बार तार टूट कर गिरने से इंसान और मासूम जानवर इसकी चपेट में आ चुके हैं। इतना सब होने पर भी बिजली विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
सिटिजन रिपोर्टर अरविंद शाव के मुताबिक किसी तरह की बड़ी घटना या अनहोनी को रोकने के लिए ग्रामीणों ने सजगता दिखाते हुए इन सभी चीजों की मरम्मत कार्य के लिए सहायक विधुत अभियंता शहरी एंव ग्रामीण को दो बार आवेदन दिया। ग्रामीणों ने पहला आवेदन 11 जुलाई 2015 और दूसरा 8 अप्रैल 2016 को दिया था लेकिन इस पर किसी तरह की कारवाई नहीं हुई। इसके बाद विधुत अधिक्षक अभियंता,विधुत आपूर्ति अंचल चास (बोकारो ) को इस समस्या के निदान के लिए 23 अगस्त 2016 को आवेदन दिया गया। समस्या का हल तो दूर, इन पदाधिकारियों के इस उदासीन रवैये की वजह से स्थिति जस की तस बनी हुई है | जिसका खामियाज़ा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।
अब इसे सरकार का ढोंग कहा जाए या दोहरी नीति कही जाए। जहां झारखंड राज्य सरकार सभी गांवों में बिजली देनी की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर उसी पार्टी के विधायक एवं सांसद इस मुद्दे पर चुप रह कर ग्रामीणों की समस्या को नज़रअंदाज करते जा रहे हैं। यहीं वजह है कि अब ग्रामीण अपनी समस्या के लिए आगे बढ़कर आंदोलन करने कि बात कर रहे हैं। उनके मुताबिक अब जनप्रतिनिधियों एवं संबंधित विभाग से उम्मीद लगाकर बैठना धोखा ही होगा।


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