सावन में लें मुर्गे का स्वाद, आ गया झारखण्ड का देशी मुर्गा..
10 जुलाई दिन सोमवार से सावन की शुरुआत हो रही है और सावन की जब बात हो रही हो तो भला रुगड़ा का जिक्र कैसे न हो। सावन की रिमझिम फुहार के साथ बरसात के मौसम में झारखंडवासियों का पसंदीदा सब्जी रुगड़ा बाजार में मिलने लगता है। बोकारो के बाजारों में भी ग्रामीण इलाके से आदिवासी महिलाएं और पुरुष इसे बेचने के लिए लाने लगे हैं। काफी महंगा होने के बावजूद सावन में लोग इसे बड़े चाव से खरीदते और इसकी सब्जी बनाकर खाते हैं।
रुगड़ा आमतौर पर बरसात में जंगलों में मिलता है। कहा जाता है की बरसात में जब बादल गरजते हैं, तब जमीन पर एक निशान सा बन जाता है और रुगड़ा धरती के अंदर से बाहर आने लगता है। ग्रामीण एक छोटी सी लकड़ी की मदद से उक्त स्थान पर कोड़ कर रुगड़ा निकालते हैं। यह मशरूम की प्रजाति का होता है और स्वाद के साथ-साथ भरपूर पौष्टिक भी होता है। रुगड़ा मटन की तरह बनाया जाता है और इसका स्वाद भी मटन से मिलता-जुलता होता है। इसलिए सावन आते ही इसकी माँग और कीमत दोनों बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। शुरूआत में अभी रूगड़ा सेक्टर-4 में 200 रूपए किलो मिल रहा है।
सावन के साथ ही रुगडा और महंगा बिकने लगेगा। रुगड़ा को सावन का मुर्गा भी बोलते हैं और इसे बनाने का तरीका भी मुर्गे से काफी मिलता-जुलता है। झारखंड में रुगड़ा पसंदीदा खाद्य पदार्थ है और ग्रामीण आदिवासियों के लिए रोजगार का साधन भी है। यह काफी पौष्टिक सब्जी है और धोने के बाद रुगडा गोल-गोल सफेद दिखता है।
रूगड़े की सब्जी बनाने की विधि –
सामग्री : रूगड़ा, सरसो तेल, प्याज, अदरक , लहसुन का पेस्ट, गोलकी पाउडर, जीरा पाउडर, गरम मसाला, हल्दी, मिर्चा पाउडर, खड़ा जीरा, तेजपत्ता, नमक।
बनाने की विधि : सबसे पहले एक कड़ाही में तेल गर्म कर के अच्छी तरह रुगड़ा को भून लें। अब एक कुकर या कड़ाही लें और तेल गर्म कर लें। जीरा और तेजपत्ता डालें। थोड़ी देर में बारीक कटा प्याज डालकल भूरा होने तक भुने फिर अदरक लहसुन का पेस्ट हल्दी और मिर्चा पाउडर डालकर थोड़ी देर और भुने। इसके बाद गोलकी,जीरा और गरम मसाला डालकर अच्छी तरह से मसाले को पका लें और रुगड़ा डालकर धीमी आँच पर पकने दें। अगर जरूरत पड़े तो कुकर में डालकर पकाया जा सकता है। रुगडा का आनंद गरमा-गरम चावल के साथ लें।



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