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ग्रामीण बच्चों के भविष्य को उज्जवल कर रहा चरगी का पुस्तकालय..

देश की चरमरायी शिक्षा व्यवस्था के बीच एक गांव ऐसा भी है जहां बच्चों के लिए आधुनिक सुविधा से लैस पुस्तकालय वरदान साबित हो रही है। जी हां, बोकारो के पेटरवार जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर दूर चरगी पंचायत के लरबदार गांव में बच्चों की सुविधा के लिए एक समिृद्ध पुस्तकालय की स्थापना की गई है। इस पुस्तकालय में कक्षा छह से लेकर स्नातक तक की किताबें रखी गई हैं। इसके अलावा अलग-अलग प्रतियोगी परिक्षाओं की तैयारी के लिए भी यहां किताबें उपलब्ध कराई जाती है। इतना ही नहीं यहां ग्रामीण बच्चों को कम्प्यूटर की शिक्षा भी दी जाती है। साथ ही साथ शहर में पढ़ रहे बच्चों की तरह इन्हें भी इंटरनेट की जानकारी और सुविधा दी जाती है। गांव के छात्र-छात्राएं यहां आकर परीक्षा की तैयारी और ग्रुप डिस्कसन भी करते हैं। 


दरअसल इस पुस्तकालय की स्थापना इसी गांव के युवा निवासी नीरज करमली ने पहल पर की गयी। नीरज ने बताया की रांची के संतजेवियर्स कॉलेज में आएससी की पढ़ाई करते वक्त उन्हें किताबों के अभाव से जूझना पड़ा था। तभी उन्होंने ये ठान लिया था की गांव के किसी दूसरे बच्चे को इस अभाव से नहीं गुजरने देंगे। इसके लिए उन्होंने सामूहिक चंदे  के सहयोग से गांव में 15 अगस्त, 2014 को पुस्तकालय स्थापित करवाया। 


गांव में सन् 1999 में सांसद रवींद्र पांडेय ने एक लाख 19 हजार की लागत से एक सामूदायिक भवन बनवाया था जिसकी हालत बिलकुल जर्जर हो चुकी थी। इस भवन का जीर्णोधार कर इसे  पुस्तकालय में तब्दील कर दिया गया। इसके लिए तत्कालीन प्रमुख मनोज कुमार गुप्ता ने 13वें वित्त आयोग से 2 लाख 51 हजार की सहायता राशि पास करा कर कम्प्यूटर तथा किताबें भी मुहैया कराईं। 


अब इस पुस्तकालय को सही ढंग से चलाने के लिए एक कमेटी बनाई गई है। साथ ही आज डॉ एपीजे अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि पर इस पुस्तकालय का नाम  "डॉ एपीजे अब्दुल कलाम पुस्तकालय, चरगी(पेटरवार) कर दिया गया। कमेटी में अध्यक्ष नीरज करमाली के अलावा राजकिशोर महतो, जो पेशे से शिक्षक भी हैं, मुख्य सलाहकार की भूमिका निभाते हैं और सलाहकार समिति में गांव के मुखिया एवं अन्य 7 सदस्य अपना योगदान दे रहें हैं। सबसे अच्छी बात ये कि इस पुस्तकालय की मैनेजिंग कमेटी में गांव के 10 बच्चे भी शामिल हैं जिनमें 5 लड़के और 5 लड़किया हैं। ग्रामीण बच्चों की शिक्षा में सुधार लाने के लिए ये कदम वाकई सराहनीय है। 

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