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250 साल पुराना रामडीह का भोक्ता पर्व..

पूरी दुनिया में भारत को पारंपरिक और सांस्कृतिक उत्सव के देश के रूप में अच्छी तरह से जाना जाता है | हमारे देश में कई ऐसे भी पर्व मनाये जाते हैं जो देखने वाले लोगो के रोंगटे खड़े कर देता है | उसी में से एक पर्व है जिसका नाम “भोक्तापर्व” जिसको“चरक पूजा” के नाम से भी जाना जाता है |


यह पर्व भारत के कई राज्यों में अलग अलग नाम से मनाया जाता है  जैसे महारास्ट्र में “बगाड पर्व”, आँध्रप्रदेश में “सिरिमणु उत्सवम” पश्चिम बंगाल एवं त्रिपुरा में “चरक पूजा” तथा हमारे झारखण्ड में “भोक्ता पर्व” के नाम से मनाया जाता है | 


इस पर्व में भक्त भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते है | वास्तव में यह पर्व भगवन शिव को संतुस्ट करने के लिए मनाया जाता है | एक दन्त कथा के अनुसार यह पर्व सबसे पहले बानासुर ने मनाया था| बानासुर ने भगवन शिव को खुश करने के लिए शरीर में लोहे का किल ठुकवा कर भगवान शंकर की पूजा अर्चना की थी, तब भगवान शंकर बानासुर से प्रसन्न होकर वर मांगने को कहा था | आज भी जो भक्त इस पूजा को करते हैं वह अपने शरीर के अलग-अलग हिस्सों में लोहे के बने हुए किल ठुकवाते हैं और लगभग 50 फीट उचे लकड़ी के बने झूले में लटक कर परिक्रमा लगते है | लोगों का मानना है की यह त्योहार पिछले वर्ष के दुःख और कस्ट को नष्ट कर के ख़ुशी और समृद्धि ले कर आता है |




एक अन्य मान्यता के अनुसार जब माता पार्वती अपने पिता के घर में खुदखुसी कर लेती हैं तब भगवान शंकर माता पार्वती के शव को ले कर तांडव करने जा रहे होते हैं तब जो कस्ट भगवान शंकर के दिल में हो रहा होता है उसी दर्द को बटने या फिर उस दर्द को समझने के लिए भोक्ता पर्व मनाया जाता है |


हमारे शहर बोकारो में यह पर्व कई छोटे- छोटे गांवो जैस -रामडीह, कसमार, जरीडीह, नवाडीह, पुण्डरु आदि में बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है |  


इस पर्व की तैयारी लगभग एक महीने पहले से शुरू हो जाती है | भोक्ता का पर्व यहाँ के लोगो के लिए एक बहुत ही महत्वर्पूर्ण पर्व है लोगो की आस्था इस पर्व से इतनी जुडी है की वे अपने शरीर के कष्ट को भूल कर इस पर्व में शामिल होते हैं|


चास प्रखंड स्थित रामडीह गाँव के लोगो ने बताया की ये पर्व लग-भग 250 वर्षो से भी पहले से इस गाँव में मनाया जा रहा है | इस पूजा के दिन जो लोग भोक्ता लेते है वो लोग 1 से 3 दिनतक का उपवास रखते है , सबसे पहले गाँव के मंदिर के जो मुख्य पुजारी होते हैं वो भोक्ता लेते हैं, उन के बाद ही गाँव का कोई अन्य व्यक्ति भोक्ता लेसकता है | 


गाँव वालो का कहना है की आज तक भोक्ता लेने वाले को किसी प्रकार का कोई संक्रमण नहीं हुआ है | 


उनका ये भी कहना है कि भगवान शंकर में इतनी शक्ति होती है की भोक्ता लेने वाले को भोक्ता लेते समय किसी प्रकार का दर्द नहीं होता है या ये कहें की उनमे इतनी उर्जा प्रवाह होने लगती की दर्द का एहसास नहीं होता |लोगों ने ये भी बताया की भोक्ता लेने वाले भोक्ता लेने के दुसरे दिन से ही ठीक हो जाते हैं | 

(रिपोर्ट : पंकज कुमार)

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