कुत्तों की संख्या रोकने को कुत्ता नसबंदी केंद्र..
अब चास में आवारा कुत्तों की नसबंदी होगी। इसके लिए डेढ़ करोड़ की लागत से एक एकड़ जमीन में पशु जन्म नियंत्रण केंद्र बनेगा। नगर विकास विभाग ने ऐसे केंद्रों की स्थापना के लिए डीपीआर बनाने के निर्देश दिए हैं।
दरअसल विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) की ओर से राज्य सरकार को भेजी गई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि किसी भी शहर में प्रत्येक 100 इंसान पर तीन कुत्ते ही ठीक हैं। अगर किसी शहर में इससे ज्यादा कुत्ते हैं, तो उनकी वृद्धि दर को नियंत्रित करने के उपाय किए जाने चाहिए। इसमें पालतू और आवारा दोनों तरह के कुत्ते शामिल हैं। डब्लूएचओ की इस रिपोर्ट के बाद सरकार के कान खड़े हुए हैं। कुत्तों की जन्मदर को नियंत्रित करने की पहल तेजी से शुरू हुई है। सरकार जल्दी ही इन मामलों की विशेषज्ञता वाले गैर सरकारी संगठनों से प्रस्ताव मांगने की तैयारी कर रही है। बता दें की आवारा कुत्ते विभिन्न बीमारियों के वाहक होते हैं और उनके काटने पर तुरंत चिकित्सा आवश्यक होती है। रैबीज के ज्यादा केस आवारा कुत्तों के काटने से ही होते हैं। यदि इसका वायरस व्यक्ति की केंद्रीय स्नायु प्रणाली में प्रवेश कर जाए तो इससे पैदा संक्रमण लगभग असाध्य होता है और कुछ ही दिनों में रोगी की जान ले बैठता है। सही ढंग से इलाज न कराने पर तो काटने के कई वर्ष बाद भी इसके विषाणु व्यक्ति को शिकार बना सकते हैं।
नगर विकास विभाग ने पहले चरण में झारखण्ड के 13 शहरों ( चास, धनबाद, देवघर, रांची, आदित्यपुर, हजारीबाग, मानगो, जमशेदपुर, गिरिडीह, रामगढ़, साहेबगंज, मेदिनीनगर और जुगसलाई) का चयन पशु जन्म नियंत्रण केंद्रों की स्थापना के लिए किया है। इन शहरों के नगर निकायों को अपने यहां ऐसे केंद्र की स्थापना के लिए एक सोसाइटी का गठन करने को कहा गया है।


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