जहाँ राम जी का जन्मस्थान वहाँ बने राममंदिर : श्री रामभद्राचार्य
बोकारो के चास प्रखंड अंतर्गत नावाडीह काली मंदिर में आयोजित श्री अन्नपूर्णा महायज्ञ में विश्व विख्यात, पद्मविभूषित, श्रीमदजगतगुरु रामनंदचार्य तुसलीपीठाधेश्वर रामभद्राचार्य जी महाराज (चिरकुटधाम) का आगमन हुआ। यह आठ दिवसीय यज्ञ था। बुधवार को इस महायज्ञ का समापन हुआ।
बता दें की इस यज्ञ में आये जगतगुरु श्री राम भद्राचार्य जी कई भाषाओँ के जानकार हैं और अयोध्या मामले में इलाहबाद कोर्ट के सामने विटनेस के तौर पर पेश हुए हैं।
चुकी अयोध्या हिन्दुओं की आस्था का केंद्र है और अयोध्या में एक भव्य राम मंदिर था, ये हर हिन्दू मानता है। लेकिन ये मामला विवादों के कारण कोर्ट में है। पौने दो सौ सालो से अदालतों में बार-बार इस मामले पर जिरह हो रही है। मुसलामानों का दावा है की मस्जिद एक खाली जमीन पर बनाई गयी वहां कोई मंदिर नहीं था। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की तरफ इस मामले में एक तर्क भी दिया गया की जिस वक़्त बाबरी मस्जिद बनाई गयी वही काल तुलसीदास का था।तुलसीदास जैसे राम भक्त ने कहीं राम मंदिर तोड़े जाने का जिक्र नहीं किया ऐसा भला कैसे हो सकता है??
इसी सवाल पर हमारे संवाददाता ने जगतगुरु श्री रामभद्राचार्य जी से ख़ास मुलाकात की, क्योंकि इन्होने ही अयोध्या मामले में कोर्ट के सामने तुलसी दास के दोहाशतक को रखा है।
जब हमारे संवाददाता ने श्री राम भद्राचार्य से पूछा की क्या आपने दावा किया है की तुलसी दास की रचना तुलसीशतक में राम लला के मंदिर का जिक्र है। इसपर श्री राम भद्राचार्य जी ने स्वयं तुलसीशतक के दोहे और उन दोहे में लिखी बातों का मतलब समझाया साथ ही अयोध्या विवाद पर अपने जबाब भी दिए।
आइये सुनते हैं तुलसी शतक के वे दोहे और रामभद्राचार्य जी के जबाब, देखें वीडियो..
बता दें की अभी इस मामले में 21 मार्च 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने आपसी सहमति से विवाद सुलझाने की बात कही थी फिर 19 अप्रैल 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती सहित बीजेपी और आरएसएस के कई नेताओं के खिलाफ आपराधिक केस चलाने का आदेश दिया। पिछले हफ्ते करीब 50 से अधिक मुस्लिम कारसेवक हजारों ईटें लेकर अयोध्या भी पहुंचे थे और अयोध्या में ही राम मंदिर बनाने की बात कही। हालांकि पुलिस ने कारसेवकों को विवादित परिसर के पास नहीं जाने दिया और उन्हें समझा-बुझाकर वापस भेज दिया गया। फिलहाल यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
(रिपोर्ट : बृजभूषण द्विवेदी)


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