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सिख दंगा आयोग से मिले बोकारो फेडरेशन सदस्य..

सिख दंगा आयोग के चेयरमैन जस्टिस डीपी सिंह ने स्पष्ट किया है कि 84' के सिख नरसंहार के पीड़ित जिन लोगों को मुआवजा चाहिए उन्हें दस्तावेज के साथ हलफनामा देना होगा। आयोग हलफनामा के साथ संलग्न दस्तावेज के आधार पर निर्णय लेगा। जस्टिस सिंह आज मंगलवार को अपने रांची स्थित आवासीय कार्यालय पर दंगा पीड़ित सिखों के मुआवजा दावों की सुनवाई कर रहे थे। इस दौरान ऑल इंडिया सिख स्टूडेंट्स फेडरेशन के पूर्वी भारत प्रमुख सतनाम सिंह गंभीर के नेतृत्व में बोकारो यूनिट के सदस्यों ने आयोग के चेयरमैन जस्टिस डीपी सिंह से भेंट की।


फेडरेशन की बोकारो यूनिट के प्रभारी रविंदर सिंह सलूजा ने आयोग के अध्यक्ष को बताया कि 84' दंगा के बाद स्थानीय जिला प्रशासन की ओर से अंतरिम राहत के तौर पर बहुत कम राशि दी गई थी। इसे दंगा पीड़ितों को हुए नुकसान की पूर्ति का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए, क्योंकि नानावती आयोग ने क्षति पूर्ति के रूप में दी गई राशि की दस गुना रकम मुआवजा के तौर पर पीड़ितों को देने की सिफारिश की है । जबकि बोकारो जिला प्रशासन अंतरिम राहत के तौर पर दी गई राशि को आधार मान कर उसकी दस गुना राशि मुआवजा देकर पल्ला झाड़ ले रहा है। वहीं बोकारो यूनिट के सदस्य जसमीत सिंह सोढ़ी और सुखविंदर सिंह ने भी आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखा।

आज हुई सुनवाई के दौरान बोकारो जिला प्रशासन की ओर से वहां की सिटी मैजिस्ट्रेट सुश्री मेनका उपस्थित रहीं। उन्होंने बताया कि बोकारो के 70 दंगा पीड़ितों में से 56 लोगों को मुआवजा राशि का भुगतान किया जा चुका है। बाकी बचे 14 में से 3 पीड़ित बेरमो के हैं। वहीं 11 लोगों में से 5 पीड़ितों की ओर से कोई भी मुआवजा लेने को सामने नहीं आया है। जबकि 6 लोगों को 25 जुलाई को मुआवजा राशि का भुगतान कर दिया जाएगा।

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