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बोकारो के बॉलीवुड अभिनेता अंकित वर्मा ने मोहम्मद रफी को श्रद्धासुमन अर्पित किया..

हिन्दी सिनेमा के सुरों के सरताज मोहम्मद रफी साहब की आज 37वीं पुन्यतिथि है। 'तुम मुझे यूं भुला ना पाओगे...  70 की दशक में उनका गाया हुआ ये गाना सच ही तो है। आज भी उनके गाये हुए गाने और आवाज लोगों के दिलों को छू जाती है। ये उनकी आवाज का जादू ही था जिसने हिन्दी सिनेमा को एक नई ऊंचाई दी। यहीं वजह है कि आज उनके पुन्यतिथि पर पूरा बॉलीवुड उन्हें याद कर रहा है। 


मुम्बई के जुहू तारा मार्ग के कब्रगाह में मो. रफी साहब की मज़ार है। जहां बॉलीवुड की हस्तियों ने उन्हें श्रदांजलि दी। इसी क्रम में बोकारो के अंकित वर्मा,जिन्होंने हाल ही में आई फिल्म बैंक चोर में अहम किरदार निभाया था,ने भी रफी साहब की मज़ार पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। 


रफी साहब ने महज 13 साल की छोटी सी उम्र में गायकी की शुरुआत कर दी थी। 36 सालों के अपने करियर में उन्होंने 25 हजार से भी ज्यादा तरानों को अपनी आवाज़ दी। गाना क्लासिकल हो या चुलबुला रफी साहब अपनी आवाज़ उसी हिसाब से ढ़ाल लेते थे, जैसे कि फिल्म जंगली का चाहे मुझे कोई जंगली कहे एक बेहतरीन उदाहरण है। मुहब्बत के तराने हो या दर्द भरे नगमें, अपने सुरों से वो उसमें जान डाल देते थे। मिसाल के तौर पर फिल्म दोस्ती का  चाहूंगा मैं तुझे शाम सवेरे गीत।  


रफी साहब ने हिन्दी, पंजाबी, और अन्य भाषाओं में भी गीत गाये हैं। गायकी की प्रतिभा के लिए उन्हें 1967 में पद्मश्री से नवाजा गया, उन्हें बेस्ट प्लेबैक सिंगिंग के लिए एक बार नैशनल अवॉर्ड और छह बार फिल्मफेयर अवॉर्ड दिया गया। रफी साहब का जन्म 24 दिसंबर 1924 को कोटला सुल्तान सिंह में हुआ था। 55 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने की वजह से उनका निधन हो गया था और उन्होंने आज ही के दिन 1980 में इस दुनिया को  अलविदा कह दिया। जिंदगी के इतने कम सालों में भी उन्होंने अपनी आवाज़ का ऐसा जादू बिखेरा की 37 साल बाद भी लोग आज उनके गीतों के कायल हैं। अपने गीतों की वजह से आज वो गायकी के बेताज बादशाह हैं और उनकी जगह कोई और नहीं ले सकता। 

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